चरणों का पुजारी हूँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – एक प्यार का नगमा है

चरणों का पुजारी हूँ,

तेरे दर का भिखारी हूँ,

जिंदगी दाव पे रख दी,

प्रभु ऐसा जुआरी हूँ,

चरणों का पुजारी हूँ,

तेरे दर का भिखारी हूँ।।

ये मेरी हक़ीकत है,

चहू और मुसीबत है,

हारा हुआ प्राणी हूँ,

सुनले यदि फ़ुर्सत है,

उमरा तेरी यादो में,

प्रभु क्या ना गुजारी हूँ,

जिंदगी दाव पे रख दी,

प्रभु ऐसा जुआरी हूँ,

चरणों का पुजारी हूँ,

तेरे दर का भिखारी हूँ।।

रुख़ नेक मिलाओ तो,

दिल दिल से लगाओ तो,

मुद्दत से जो प्यासा हूँ,

दो घुट पिलाओ तो,

तस्वीर अदा तेरी,

इस दिल में उतारी है,हूँ,

जिंदगी दाव पे रख दी,

प्रभु ऐसा जुआरी हूँ,

चरणों का पुजारी हूँ,

तेरे दर का भिखारी हूँ।।

हर बात समझते हो,

अंजान भी बनते हो,

नाराजी है क्या ऐसी,

दिलदार ना मनते हो,

दीवाना हूँ जिस दिन से,

छवि नेक निहारी हूँ,

जिंदगी दाव पे रख दी,

प्रभु ऐसा जुआरी हूँ,

चरणों का पुजारी हूँ,

तेरे दर का भिखारी हूँ।।

‘शिव श्याम बहादुर’ के,

दो नैनो के ज्योति हो,

करुणा ही तेरी प्यारे,

बदनाम जो होती हो,

कहने भी नही पाता,

नौकर सरकारी हूँ,

जिंदगी दाव पे रख दी,

प्रभु ऐसा जुआरी हूँ,

चरणों का पुजारी हूँ,

तेरे दर का भिखारी हूँ,

जिंदगी दाव पे रख दी,

प्रभु ऐसा जुआरी हूँ,

चरणों का पुजारी हूँ,

तेरे दर का भिखारी हूँ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।