मेरी खुल गई पटक देके अख नी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी खुल गई पटक दे के अख नी,

गली दे विचो कौन लंगेया,

श्याम उते पेंदा मैनु शक नी,

गली दे विचो कौन लंगेया,

मेरी खुल गई पटक दे के अख नी॥

जद पहुये ओहदे खड़ खड़ खड़के,

अख खुल गई मेरी पटक देनी तड़के,

तू बी वेख लै वारि दी कुंडी खोल नी,

गली दे विचो कौन लंगेया,

मेरी खुल गई पटक दे के अख नी......

साडे घर बोल्दा बनेरे उते काग नी,

शायद साडे ओह जगाऊंन आया भाग नी,

तू वि वेख ले बूहे दी चिक चिक नी,

गली दे विचो कौन लंगेया,

मेरी खुल गई पटक दे के अख नी......

ओहने पिंडे उते कमली पायी ऐ,

हथ मुरली मोदे ते कुर्ती पाई ऐ,

ओहदी मुरली करे धुन धुनी नी,

गली दे विचो कौन लंगेया,

मेरी खुल गई पटक दे के अख नी.....

साडी गली अज श्याम फेरा पा गया,

कइयां दुखियां दे दुखड़े मिटा गया,

जांदी वारि मुहो बोलेया राधे राधे नी,

गली दे विचो कौन लंगेया,

मेरी खुल गई पटक दे के अख नी......

जेह्ड़े प्यार श्याम नाल पाऊंनगे,

हारावाले श्याम ओहदी विगड़ी बनाऊंगे,

कइयां दुखियां दे दुःख गया कट नी,

गली दे विचो कौन लंगेया,

मेरी खुल गई पटक दे के अख नी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।