चिड़ियों की है चहकार

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॥ पावन पाठ ॥

चिड़ियों की है चहकार,

मगर तेरी कमी है,

फूलों की हैं महकार,

मगर तेरी कमी है,

ओ माँ, प्यारी माँ.....

मेरी गलतियों पे तेरा,

आँचल में छिपाना,

भूले नहीं वो प्यार,

मगर तेरी कमी है,

ओ माँ, प्यारी माँ.......

तेरी तरह ना जाग के,

कोई मुझको सुलाए,

रिश्ते हैं माँ हज़ार,

मगर तेरी कमी है,

ओ माँ, प्यारी माँ.......

चिड़ियों की है चहकार,

मगर तेरी कमी है,

फूलों की हैं महकार,

मगर तेरी कमी है,

ओ माँ, प्यारी माँ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।