मात जगदम्बे तेरे बिन कोई ना हमारा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मात जगदम्बे तेरे बिन कोई ना हमारा है, मात जगदम्बे,

तू ही तो एक सहारा है ॥

माता जगदम्बे तेरे बिन कोई ना हमारा है, मात जगदम्बे॥

थोड़ी सी मिल जाये कृपा हमे तेरी,

तो रंग जीवन के खिल जाए,

मुझको धरती पर ही जन्नत की सारी,

खुशियां मात मिल जाये,

मेरे मन मंदिर में तेरे नाम का उजारा है,

तू ही तो एक सहारा है,

मात जगदम्बे तेरे बिन कोई ना हमारा है,

मात जागदम्बे।

कहते है बिन मांगे देती है तू सब कुछ,

तो कोई तुझसे क्या मांगे,

तेरे दर्शन की बस एक अभिलाषा,

और झूठा सब तेरे आगे,

नाम एक साँचा बाकी झूठा जग सारा है,

तू ही तो एक सहारा है।।

मात जगदम्बे तेरे बिन कोई ना हमारा है,

मात जागदम्बे।

ये चंद्र सोने के सिक्के मेरी अम्बे,

झूठी सारी माया है,

जन्म लेकर के और मिट जाती,

भला ये कैसी क्या है,

राजेन्द्र ने जाना साँचा तेरा दीदारा है,

तू ही तो एक सहारा है,

मात जगदम्बे तेरे बिन कोई ना हमारा है

तू ही तो एक सहारा है,

मात जगदम्बे......

गीतकार/गायक - राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।