बंसीवट तेरा करुँगी मैं इंतज़ार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बंसीवट बंसीवट,

तेरा करुँगी मैं इंतज़ार,

यमुना तट यमुना तट,

तुझको पुकारुंगी बारबार,

बंसीवट बंसीवट,

तेरा करुँगी मैं इंतज़ार,

यमुना तट यमुना तट,

तुझको पुकारुंगी बारबार,

देखा है आज तुमने हमे,

छाने लगा है प्यार,

बंसीवट बंसीवट,

तेरा करूँगा मैं इंतज़ार,

यमुना तट यमुना तट,

तुझको पुकारूंगा बारबार,

देखा है आज तुमने हमे,

छाने लगा है ये प्यार,

बंसीवट बंसीव

तेरा करुँगी मैं इंतज़ार........

तेरा मेरा है एक रास्ता,

जनम जनम का है साथ,

चैन ना पाऊ बिन तेरे,

हाथो में देदे तू हाथ,

आयी है कैसी ये घड़ी,

तड़पी हूँ मैं दिन रात,

मस्ती भरे इस मौसम में,

राधे तू कर ले बात,

रात और दिन तड़पते है,

चाहे माने ना माने,

ओ रात और दिन तड़पते है,

चाहे माने ना माने,

बंसीवट बंसीवट,

तेरा करुँगी मैं इंतज़ार.......

आजा तू जमुना किनारे पे,

मिलके रचाएंगे रास,

आजा तू जमुना किनारे पे,

मिलके रचाएंगे रास,

ओ खेलेंगे आँख मिचोली हम,

राधे तू आजा पास,

खेलेंगे आँख मिचोली हम,

राधे तू आजा पास,

आजा चोरी चुपके चुपके,

अब ना कर तू बहाने,

हो आजा चोरी चुपके चुपके,

अब ना कर तू बहाने,

बंसीवट बंसीवट,

तेरा करुँगी मैं इंतज़ार........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।