चली आ शेरा वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चली आ शेरा वाली,

चली आ ज्योता वाली,

चली आ पहाड़ा वाली,

चली आ मेहरा वाली,

तेरा सजा हुआ दरबार,

है ऊँचे डेरा वाली।।

तेरे नाम की ज्योत जगाऊँ,

मैं तेरी महिमा गाऊँ,

गाऊँ महिमा बारम्बार,

चली आ शेरा वाली,

गाऊँ महिमा बारम्बार,

चली आ शेरा वाली,

चली आ शेरा वाली,

चली आ ज्योता वाली,

चली आ पहाड़ा वाली,

चली आ मेहरा वाली,

तेरा सजा हुआ दरबार,

है ऊँचे डेरा वाली।।

तुम्हे लाल चुनरिया ओढ़ाऊँ,

तेरे माथे बिंदिया लगाऊँ,

तेरा करूँ सोलह श्रृंगार,

चली आ शेरा वाली,

तेरा करूँ सोलह श्रृंगार,

चली आ शेरा वाली,

चली आ शेरा वाली,

चली आ ज्योता वाली,

चली आ पहाड़ा वाली,

चली आ मेहरा वाली,

तेरा सजा हुआ दरबार,

है ऊँचे डेरा वाली।।

तेरा भाव से भोग लगाऊँ,

पूड़ी हलवा चना खिलाऊँ,

तेरा रस्ता रही निहार,

चली आ शेरा वाली,

तेरा रस्ता रही निहार,

चली आ शेरा वाली,

चली आ शेरा वाली,

चली आ ज्योता वाली,

चली आ पहाड़ा वाली,

चली आ मेहरा वाली,

तेरा सजा हुआ दरबार,

है ऊँचे डेरा वाली।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।