पहली पूजा मात पिता की

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॥ पावन पाठ ॥

जय जय मात पिता,

जय हो गुरुवार प्यारे,

पहली पूजा मात पिता की,

दूजे गुरुवार प्यारे,

ये दोनों राज़ी तो राज़ी,

देवी देवता सारे,

पहली पूजा मात पिता की,

दूजे गुरुवार प्यारे,

जय जय मात पिता,

जय हो गुरुवार प्यारे।

सुन्दर से संसार में हमकों,

मात पिता ही लाते हैं,

अच्छे बुरे का फर्क हमें,

प्यारे गुरुवार समझाते हैं,

इनके आशीर्वाद से,

पल में होते वारे न्यारे,

पहली पूजा मात पिता की,

दूजे गुरुवार प्यारे,

जय जय मात पिता,

जय हो गुरुवार प्यारे।।

मात पिता की सेवा करना,

हर औलाद का फ़र्ज़ है,

कोई जिसको चुका ना पाया,

ये तो ऐसा क़र्ज़ है,

मात पिता के एहसान हमसे,

कैसे जाएँ उतारे,

पहली पूजा मात पिता की,

दूजे गुरुवार प्यारे,

जय जय मात पिता,

जय हो गुरुवार प्यारे।।

बारम्बार प्रणाम करें हम,

मात पिता के चरणों में,

कोटि कोटि नमन करें,

हम गुरुदेव के चरणों में,

मात पिता और गुरु चरणों में,

तीर्थ धाम हैं सारे,

पहली पूजा मात पिता की,

दूजे गुरुवार प्यारे,

जय जय मात पिता,

जय हो गुरुवार प्यारे।।

पहली पूजा मात पिता की,

दूजे गुरुवार प्यारे,

ये दोनों राज़ी तो राज़ी,

देवी देवता सारे,

पहली पूजा मात पिता की,

दूजे गुरुवार प्यारे,

जय जय मात पिता,

जय हो गुरुवार प्यारे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।