राम रमैया श्याम कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे राम….मेरे श्याम…..हे राम

तेरे जोग में हो गया जोगी,

भोग त्याग में हो गया योगी,

तेरी धुन में रम जाने दे,

तेरी शरण में अब आने दे,

मेरे राम रमैया मेरे श्याम कन्हैया.........

रघुपति राघव राजा राम,

पतित पावन सीता राम,

धुन तेरी ही मुझको लगी है,

मन तेरा ही अनुरागी है,

धुन तेरी ही मुझको लगी है,

मन तेरा ही अनुरागी है,

तेरी सिवा कोई रूप ना भाये,

बिन देखे तुझे मन अखुलाये,

तेरी ही धुनकी अब छाने दे,

तेरी ही महिमा अब गाने दे,

मेरे राम रमैया मेरे श्याम कन्हैया........

रामा रामा रामा हो,

रामा रामा रामा,

मेरे रामा रामा रामा हो,

रामा रामा रामा हो,

मैं तुझ में ऐसे मिल जाऊ,

और किसी को नज़र ना आऊ,

तेरे दर ना छोड़ के जाऊँ,

तेरे दर पे प्राण लुटाऊँ,

पाप की नगरी ताज आने दे,

पथ मुख्ती का अब पाने दे,

मेरे राम रमैया मेरे श्याम कन्हैया,

हो रामा रामा......

मेरे राम रमैया, मेरे राम रमैया.....

मेरे श्याम हे राम.....

मेरे श्याम हे राम.......

मेरे राम रमैया, मेरे राम रमैया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।