चिट्ठी आई महारानी दी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नी मैं घुट के कलेजे नाल लाई,

चिट्ठी आई महारानी दी,

नाले पढ़ पढ़ होवां मैं शुदाई

चिट्ठी आई महारानी दी.........

गली विच आके जद डाकिया बोलया,

सुद्ध बुद्ध भूली जद बुहा मैं खोलया,

मेरी सफल हो गई कमाई,

चिट्ठी आई महारानी दी.........

चिट्ठी वेख मैनू मईया चढ़ गई खुमारियाँ,

अम्बरा दे विच फिरा लादियाँ उडारियाँ,

ठंड चिट्ठी ने कलेजे विच पाई,

चिट्ठी आई महारानी दी........

चिट्ठी विचों आवे सोहनी खुशबू माँ प्यार दी,

चिट्ठी कादी आई रूत आ गई बहार दी,

नी मैं चिट्ठी दी करा वडयाई,

चिट्ठी आई महारानी दी,

नी मैं घुट के कलेजे नाल लाई,

चिट्ठी आई महारानी दी,

नाले पढ़ पढ़ होवां मैं शुदाई

चिट्ठी आई महारानी दी.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।