कर दो साईं हम पर रहमों कर्म

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – बहुत प्यार करते है।

कर दो साईं हम पर रहमों कर्म,

तेरा नाम भूले ना,

तेरा नाम भूले ना,

जन्मों जनम,

करदो सांई हम पर रहमो कर्म।।

शिरडी में है बाबा धाम तुम्हारा,

लगता है हमको स्वर्ग से प्यारा,

शिरडी में आयेगे हम,

शिरडी में आयेगे हम,

जब तक है दम,

करदो सांई हम पर रहमो कर्म।।

सबका है मालिक सांई बाबा हमारा,

सांई नाम से ही चलता मेरा गुजारा,

जीवन मे खुशिया आई,

जीवन मे खुशिया आई,

मिटे सारे गम,

करदो सांई हम पर रहमो कर्म।।

कैसे करूँ मैं बाबा तेरा शुक्रराना,

‘दिलबर’ दिया जो तूने ये नजराना,

‘वैष्णवी’ को प्यार तुम्हारा,

‘वैष्णवी’ को प्यार तुम्हारा,

मिले हर दम,

कर दो साईं हम पर रहमों कर्म,

तेरा नाम भूले ना,

तेरा नाम भूले ना,

जन्मों जनम,

करदो सांई हम पर रहमो कर्म।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।