तू मुझ में रहे

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॥ पावन पाठ ॥

तू मुझ में रहे, मैं तुझमें रहू,

सदा बनके तेरी रहूं,

तू मुझ में जिए, मैं तुझ से जीयु,

येशु तेरी बनके रहूं,

बनी रे बनी मैं तो तेरी, बनी रे बनी मैं तो तेरी

हा हा हा.....

हुई रे हुई मैं तो तेरी, हुई रे हुई मैं तो तेरी

जोगनिया....

जोगन बन रही मैं तो अब तेरी,

जोगन बन रही मैं तो येशु तेरी,

बनी रे बनी मैं तो तेरी, बनी रे बनी मैं तो तेरी,

हा हा हा.....

हुई रे हुई मैं तो तेरी, हुई रे हुई मैं तो तेरी,

जोगनिया.......

जब तोसे दूर हो जा जी कहे,

तुझसे जुड़कर ये जुदाई कैसे होये,

अब तुझ में मेरी मंजिल है बनी,

तुझ पे ही सजेगी मेरी जिंदगी,

तुझे जपु रात रात दिन रेह ना सकूं तेरे बिन,

हा हा हा.....

तुझे जपु रात रात दिन रेह ना सकूं तेरे बिन,

येशुआ.....

जोगन बन गई मैं तो अब तेरी,

जोगन बन गई मैं तो येशु तेरी,

बनी रे बनी मैं तो तेरी, बनी रे बनी मैं तो तेरी,

हा हा हा......

हुई रे हुई मैं तो तेरी, हुई रे हुई मैं तो तेरी,

जोगनिया जोगानिया।.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।