येशु तू मेरे घर आए

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॥ पावन पाठ ॥

एक लब्ज़ कहो,

मुझे है काफ़ी,

एक लब्ज़ कहो,

बस है काफ़ी ॥

येशु तू मेरे घर आए,

इसका मै योग्य नहीं,

मेरे साथ तुम रहो,

इस काबिल भी नहीं,

एक लब्ज़ कहो,

मुझे है काफ़ी,

एक लब्ज़ कहो,

बस है काफ़ी ॥

नामुमकिन की बातें, तुझमें नहीं,

अधिकार में तुम जैसा और कोई नहीं,

मेरा जीवन बदलेगा,

एक लफ्ज़ तेरे कहने से,

मेरी सोच भी बदलेगी,

एक लफ्ज़ तेरे कहने से,

तू कहे तो रोगी चंगा,

तू कहे तो मौत टलेगी,

यीशु तेरे कहने से,

क्या कुछ ना होगा,

एक लब्ज़ कहो,

मुझे है काफ़ी,

एक लब्ज़ कहो,

बस है काफ़ी.......

इस दुनिया में महिमा, योग्य कोई नहीं,

श्रेष्ठ हो येशु जैसा और कोई नहीं,

मेरी निराशा दूर होगी,

एक लफ्ज़ तेरे कहने से,

मेरे पाप क्षमा होंगे,

एक लफ्ज़ तेरे कहने से,

तू कहे तो पाप मिटेंगे,

तू कहे तो श्राप हटेंगे,

यीशु तेरे कहने से,

क्या कुछ ना होगा,

एक लब्ज़ कहो,

मुझे है काफ़ी,

एक लब्ज़ कहो,

बस है काफ़ी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।