हे गुरुदेव दया के सागर

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॥ पावन पाठ ॥

हे गुरुदेव दया के सागर हो.....,

हे गुरुदेव दया के सागर,

दया करो सरकार,

अब तो दया करो सरकार,

थारे बिन मेरो कोई ना पालनहार ॥

दृष्टि दया की थारी हो जग पार पड़े,

दुखिया सब संसार देख के जीव डरे,

दीन दुखी सेवकीया की सुनलयो करुण पुकार,

अब तो सुनलयो करुण पुकार,

थारे बिना मेरो कोई ना पालनहार,

हे गुरुदेव दया के सागर.........

मैं निर्बल थे सबल भगत हो पूजेडा,

जैसे थे हाथ पार लगे बेड़ा,

बाबाजी से सलाह लेकर करो मेरो उद्धार,

अब तो करो मेरो उद्धार,

थारे बिना मेरो कोई ना पालनहार,

हे गुरुदेव दया के सागर......

छल फरेब ए दुनिया का मैं क्या जानु,

थारे चरणें माय, सदा मस्ती छानु,

आगे पीछे थे महि रे, जीवन का आधार,

थारे बिना मेरो कोई ना पालनहार,

हे गुरुदेव दया के सागर......

सामर्था ने सरम, काम मेरो करणो है,

उदयालो में आख्या, हो गयी झरनो है,

श्याम बहादुर का शिव दर्दी का, संकट दीज्यो टाल,

अब तो संकट दीज्यो टाल,

थारे बिना मेरो कोई ना पालनहार,

हे गुरुदेव दया के सागर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।