राधे मोहे बृज को बनईयो मोर

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

मैं नाचूँ ता ता थई थई।

चाहे मुझे कुंजन को बन्दर बनइयों,

चाहे मुझे कुंजन को बन्दर बनइयों,

बन्दर भी निधिवन के अन्दर बनइयों,

बन्दर भी निधिवन के अन्दर बनइयों,

गोकुल को बनइयों ढ़ोर,

नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई,

नाचूँ ता ता थई थई,

ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई........

चाहे मुझे गलियन को कुकर बनइयो,

चाहे मुझे गलियन को कुकर बनइयो,

कुकर बनइयो भक्त द्वारन फिरइयो,

कुकर बनइयो भक्त द्वारन फिरइयो,

वन में घुसने ना दूँ चोर,

नाचूँ ता-ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई,

ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई........

चाहे मुझे धूल हु बनइयो वृन्दावन की,

चाहे मुझे धूल ही बनइयो वृन्दावन की,

श्री वृन्दावन की बिहारी के चरण की,

श्री वृन्दावन की बिहारी के चरण की,

जहाँ खेलें नित्य किशोर,

नाचूँ ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई,

ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई........

चाहे मुझे घुंगरुं या पायल बनइयो,

चाहे मुझे घुंगरुं या पायल बनइयो,

अपने ही रस का पागल बनइयो,

अपने ही रस का पागल बनइयो,

तेरे बंधू प्रेम की डोर,

नाचूँ ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई,

ता ता थई थई,

मैं नाचूँ ता ता थई थई,

श्री राधे मोहे बृज को बनइयों मोर,

नाचूँ ता ता थई थई........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।