कोई भाव से मेरे सतगुरु को सजा दे

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

कोई भाव से मेरे सतगुरु को सजा दे,

भाग्य जग जाएगा, भाग्य जग जाएगा।।

गुरुवर को गंगाजल से पहले नहला दो,

रोली चन्दन से तिलक लगा दो,

फिर भाव से पुष्पों का हार चढ़ा दो,

भाग्य जग जाएगा, भाग्य जग जाएगा।।

कोई भाव से मेरे सतगुरु को सजा दे,

भाग्य जग जाएगा, भाग्य जग जाएगा।।

सतगुरु को छप्पन भोग ना भाए,

भूखा है भाव का जो भी दिखाए,

फिर भाव से गुरुवर को भोग लगा दे,

भाग्य जग जाएगा भाग्य जग जाएगा।।

कोई भाव से मेरे सतगुरु को सजा दे,

भाग्य जग जाएगा, भाग्य जग जाएगा।।

गुरुवर के चरणों में स्वर्ग है लगता,

श्रष्टि झुके आसमान भी झुकता,

फिर भाव से तू अपना शीश झुका दे,

भाग्य जग जाएगा भाग्य जग जाएगा।।

कोई भाव से मेरे सतगुरु को सजा दे,

भाग्य जग जाएगा, भाग्य जग जाएगा.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।