साईं सुन लो मेरी पुकार

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॥ पावन पाठ ॥

मैं आन पड़ी तेरे द्वार, साईं सुन लो मेरी पुकार,

मेरे दुःख सब दूर करो, बाबा मेरी झोली भरो,

मेरा सुखी वसे परिवार,

मैं आन पड़ी तेरे द्वार, साईं सुन लो मेरी पुकार......

चमत्कार दिखाला दो कोई दुनिया की ठुकराई हु,

कष्ट मिटा दो मेरे बाबा आशा लेकर आई हु,

रहम की एक नजर तुम कर दो, बाबा मुझको ऐसा वर दो,

साईं मेरे तारन हार,

मैं आन पड़ी तेरे द्वार, साईं सुन लो मेरी पुकार........

दर दर पे मैं भटक रही हु पकड़ो मेरा हाथ बाबा,

धुल ना जाऊ इस दुनिया में देदो मेरा साथ बाबा,

देदो मुझको सबर सबुरी, रहे ना कोई बात अधूरी,

बस मिल जाए तेरा प्यार,

मैं आन पड़ी तेरे द्वार, साईं सुन लो मेरी पुकार.......

बड़ी दूर से चल कर बाबा द्वार तेरे मैं आई हु,

करदो पूरी साईं दिल में जो भी उमीदे लाई हु,

एक बार मेरी और निहारो, जीवन मेरा आन सवारों,

मेरी नैया करदो पार,

मैं आन पड़ी तेरे द्वार, साईं सुन लो मेरी पुकार.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।