बोलो जय माता दी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय माता दी, जय माता दी, बोल रहे हैं सारे,

धरती से अंबर तक गूंजे, माँ तेरे जयकारे,

तेरे भवन में..... रंग बरसे माँ खूब धमाल मचा,

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा बजा.........

तेरे भवन की शोभा न्यारी, जागे ज्योत नूरानी,

संकट हरनी मंगल करनी, तू है मात भवानी.....-2

तेरे द्वार से..... आज तलक कोई खाली नहीं गया,

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा बजा.........

लाल रंग का ऊँचा झण्डा, लहर लहर लहरावे,

जब तेरे नवरात्रे आवे, सब का मन हरषावे.....-2

फूल पान मिष्ठान चढ़ावे....... चुन्नी रहे उड़ा,

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा बजा.........

दूर दूर से आवे यात्री, तेरा दर्शन पाने,

तू झोली भरने वाली, सब आते अलख जगाने....-2

भक्तजनों के देती मैया...... बिगड़े काम बना

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा बजा.........

भेट लिखे तेरी मस्ती में, भरके भूलन त्यागी,

सब साजो में भरके गावे, माँ हरीश अनुरागी.....-2

पीछे सारी संगत नाचे...... आनंद खूब मिला

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा बजा.........

जय माता दी, जय माता दी, बोल रहे हैं सारे,

धरती से अंबर तक गूंजे, माँ तेरे जयकारे,

तेरे भवन में..... रंग बरसे माँ खूब धमाल मचा,

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा बजा.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।