हो बाबा रे, आजा रे..

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॥ पावन पाठ ॥

हो बाबा रे आजा रे, हो बाबा रे आजा रे,

मुझे कुछ हो रहा हैं, भक्त ये रो रहा हैं ।

याद में तेरी कबसे, मेरा दिल रो रहा हैं,

हो बाबा रे आजा रे, हो बाबा रे आजा रे ॥

सुनी आंखें, मेरे गुरुवर, तेरी राह निवारे,

इन नैनो की प्यास बुझाने जल्दी से चले आ रे ।

तेरा भक्ति में आना, भक्तो पे प्यार लुटाना,

बहोत याद आ रहा हैं, सताये जा रहा हैं ॥

हो बाबा रे आजा रे, हो बाबा रे आजा रे..

कदम कदम पर मेरे बाबा, मेरी लाज बचाते,

संकट से मुझको बचाकर, नैय्या पार लगाते ।

नैय्या ये डोल रही हैं, नैय्या को पार लगा दे,

सुनले नाकोड़ावाले, भक्तो ने तुझको पुकारा ॥

हो बाबा रे आजा रे, हो बाबा रे आजा रे..

आज अगर तुम ना आये तो होगी लोग हंसाई,

सारे जमाने में मेरे बाबा, होगी तेरी रूसवाई ।

भक्त मंडल ये गाए, दर्श की आस लगाए,

दर्श हमें दे दो बाबा, नाकोड़ा के रखवाले ॥

हो बाबा रे आजा रे, हो बाबा रे आजा रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।