साई साई बोलो साई

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

साई साई साई बोलो,

साई साई साई बोलो,

जप करे हम साई नाम का,

सुमिरन करे हम साई का,

निसदिन उसे दे हम सदा,

हमदर्द है वो हमारा,

साई बाबा,

निसदिन उसे दे हम सदा,

हमदर्द है वो हमारा।।

साई के धुन में इस जीवन का

आओ गीत रचाये

ताल बना वो हर धड़कन में

हम ये भूल ना जाये

साई के धुन में इस जीवन का, आओ गीत रचाये,

ताल बना वो हर धड़कन में, हम ये भूल ना जाये....-2

साज़ बजाये साई नाम का,

सुमिरन करे हम साई का,

निसदिन उसे दे हम सदा,

हमदर्द है वो हमारा,

साई बाबा,

निसदिन उसे दे हम सदा,

हमदर्द है वो हमारा।

मन के कोयल साई साई गाये, तन के प्राण जगाये,

साई के सुर की झंकारे, एक रोमांचित कर जाये.....-2

राग सुनाये साई नाम का,

सुमिरन करे हम साई का,

निसदिन उसे दे हम सदा,

हमदर्द है वो हमारा,

साई बाबा,

निसदिन उसे दे हम सदा,

हमदर्द है वो हमारा।

निसदिन उसे दे हम सदा,

हमदर्द है वो हमारा,

साई साई साई बोलो,

साई साई साई बोलो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।