मन बसिया ओ कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पवन प्रभाती जग को जगाती,

भंवरे भी करते है गुंजन,

पंख पसारे उड़े पखेरू,

सिन्दूरी सिन्दूरी आंगन,

मंगल मंगल बेला मंगल,

सौरभ सौरभ सारा भुवन,

इन चरणो में फूल चढ़ाने,

आयी तेरी राधा मोहन,

मन बसिया ओ कान्हा,

रंग रसिया ओ कान्हा।

मै बांवरिया सुध बुध भूली,

मुझको लागी तेरी लगन,

तेरे द्वारे सांझ सकारे,

तेरा नाम जपे मेरा मन,

जो है मेरा सब है तेरा,

तुझपे है ये जीवन अर्पण,

इन चरणो में फूल चढ़ाने,

आयी तेरी राधा मोहन,

मन बसिया ओ कान्हा,

रंग रसिया ओ कान्हा।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।