तेज हैं लेकिन गमों कि आधियाँ चल जाऐगीं

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे अपनों ने मारा औरो का क्या दम था,

मेरी कश्ती वह डूब गयी जहाँ पानी काम था,

आप गैरो की बात करते हो हमने अपनों से चोट खायी है,

आप कांटो की बात करते हो हमने फूलो से चोट खायी है।।

तेज है लेकिन गमों की आंधियां चल जाएगी,

इन चिरागों को छुआ तो उंगलियां जल जाएगी।।

झील में तुम मत नहाना मल मल के गोरा बदन,

झील में तुम मत नहाना मल मल के गोरा बदन,

आग पानी में लगेगी मछलियां जल जाएगी,

तेज है लेकिन गमों की आंधियां चल जाएगी।।

शेर ए गुलशन बागवा में खुने दिल शामिल ना कर,

शेर ए गुलशन बागवा में खुने दिल शामिल ना कर,

वरना तेरे बाग की तितलियां उड़ जाएगी,

तेज है लेकिन गमों की आंधियां चल जाएगी।।

मत सताना दुल्हनों को माल दौलत के लिए,

मत सताना दुल्हनों को माल दौलत के लिए,

वरना एक दिन आपकी बेटी सताई जाएगी,

तेज है लेकिन गमों की आंधियां चल जाएगी..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।