मेरो मन राम ही राम रटई रे

अनुराधा पौडवाल
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरो मन राम ही राम रटई रे,

राम ही राम रटई रे,

मेरो मन राम ही राम रटई रे,

राम ही राम रटई रे।

राम नाम जप लीजे प्राणी कोटिक पाप कटई रे,

राम नाम जप लीजे प्राणी कोटिक पाप कटई रे,

जनम जनम के खत जो पुराने,

जनम जनम के खत जो पुराने,

नाम ही लेत फटई रे,

मेरो मन राम ही राम रटे रे,

राम ही राम रटई रे,

मेरो मन राम ही राम रटई रे,

राम ही राम रटई रे।

कनक कटोरी अमृत भरियो पिबत कौन नटई रे,

कनक कटोरी अमृत भरियो पिबत कौन नटई रे,

मीरा कहे प्रभु हरिअविनाशी,

मीरा कहे प्रभु हरिअविनाशी,

तन मन ता ही फटई रे,

मेरो मन राम ही राम रटे रे,

राम ही राम रटई रे,

मेरो मन राम ही राम रटई रे,

राम ही राम रटई रे,

राम ही राम रटई रे,

राम ही राम रटई रे,

राम ही राम रटई रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।