विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

वक्रतुंडा महाकाया,

सूर्यकोटि सम्प्रभा,

निर्विघ्नम कुरुमे देव,

सर्व कार्येशु सर्वदा।

गणपति बप्पा मोरया

तेरा करम मेरा भरम,

मेरा धर्म तू ही तू,

जनम वनम कुछ भी नहीं,

परम तू ही तू,

सीताम वितम दया क्षमा,

अजब तेरी अदा है,

जगत तू ही भगत तू ही,

देव तू ही तू ।

हो तू ही दाता तू ही विधाता,

तेरा ये जग तू जग सारा,

तू ही आँधी तू ही तूफ़ान,

तू ही माझी तू ही किनारा,

तू सुख कर्ता तू ही दुख हरता,

तू ना होता मैं जाने क्या करता,

विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे

विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे.......

जब जब दुनिया ने हाथ नहीं थामा,

मेरा सफर देवा तेरे द्वार आया,

धूप नहीं है मेरी चाह नहीं मेरी,

सब कुछ है तेरा बप्पा मोरया,

राहें भी तेरी पनाहें भी तेरी,

इन आहों को मेरी बस तेरा सहारा,

हे सुख कर्ता तू ही दुख हरता,

तू ना होता मैं जाने क्या करता,

विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे,

विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे.......

गणपति गणपति,

गणपति बप्पा मोरया,

गणपति बप्पा मोरया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।