चांदनपुर के गाँवों में बुला ले वीरा

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॥ पावन पाठ ॥

चांदनपुर के गाँवों में बुला ले वीरा,

मैं तो दर्शन करने आउंगी,

मैं तो दर्शन करने आउंगी,

तेरो वंदन करने आउंगी,

चांदनपुर के गाँवों में बुला ले वीरा,

मैं तो दर्शन करने आउंगी,

चांदनपुर के बीचो बीच माँको स्तंभ है,

माँको स्तंभ में चतुर्मुखी टेयरो बिंब है,

बिंब पे है ज्योति, ज्योति चमके जैसे हीरा,

बुला ले रे वीरा,

मैं तो दर्शन करने आउंगी,

चांदनपुर के गाओं में बुला ले वीरा,

मैं तो दर्शन करने आउंगी।

मीना जया गुज्जर जाए मैं कैसे रह जाऊगी,

सवा शेर को लोटा लेकर चरणन दूध चढ़ाऊगी,

दर्शन करके तेरी मिट जाए सब पीड़ा

बुला ले रे वीरा,

मैं तो दर्शन करने आउंगी,

चांदनपुर के गाओं में बुला ले वीरा,

मैं तो दर्शन करने आउंगी।

सबको लेते धनिया जीरा मैं लूँगी मंजीरा,

मंदिर नीचे बैठ बजाऊ बोलू वीरा वीरा,

नाम का तेरा सुमिरन करके खुल जाए तक़दीरा,

बुला ले रे वीरा,

मैं तो दर्शन करने आउंगी,

चांदनपुर के गाओं में बुला ले वीरा,

मैं तो दर्शन करने आउंगी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।