जब दुःख से मन घबरा जाये

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॥ पावन पाठ ॥

जब दुःख से मन घबरा जाये,

हर ओर निराशा छा जाये,

जब दुःख से मन घबरा जाये

हर ओर निराशा छा जाये

जब एक किरण भी आशा की,

आती हो नहीं नजर,

प्रार्थना कर प्रार्थना कर,

जगत के पालन हारे से,

प्रार्थना कर प्रार्थना कर,

हरी ओम हरी ओम हरी ओम हरी ओम

हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ।।

तू जान बूझ कोई पाप ना कर,

हो जाये तो पश्चाताप ना कर,

तू जान बूझ कोई पाप ना कर,

हो जाये तो पश्चाताप ना कर,

ये सब लीला उस ईश्वर की,

तू ध्यान उसी का धर,

प्रार्थना कर प्रार्थना कर,

जगत के पालन हार से,

प्रार्थना कर प्रार्थना कर,

हरी ओम हरी ओम हरी ओम हरी ओम

हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ।।

जिसको ना किसी ने देखा है,

वो एक करम की रेखा है,

जिसको ना किसी ने देखा है,

वो एक करम की रेखा है,

वो सब का भाग्य विधाता है,

सबकी है उसे खबर,

प्रार्थना कर प्रार्थना कर,

जगत के पालन हार से,

प्रार्थना कर प्रार्थना कर,

हरी ओम हरी ओम हरी ओम हरी ओम

हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।