झूला झूले आम की डाल

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

झूला झूले आम की डाल,

भवानी झूला झूले।।

चंदन के पलना में झूले,

रेशम डोरी डाल,

भवानी झूला झूले,

झूला झूले आम की डाल,

भवानी झूला झूले।।

जड़े है माता के पलना में,

हीरा रतन विशाल,

भवानी झूला झूले,

झूला झूले आम की डाल,

भवानी झूला झूले।।

शिव सनकादिक रहे झुलाए,

और यशोदा के लाल,

भवानी झूला झूले,

झूला झूले आम की डाल,

भवानी झूला झूले।।

चवँर डुलावे हनुमत वीरा,

वजा वजा करताल,

भवानी झूला झूले,

झूला झूले आम की डाल,

भवानी झूला झूले।।

राजेन्द्र माँ की करत आरती,

दे दे कर के ताल,

भवानी झूला झूले,

झूला झूले आम की डाल,

भवानी झूला झूले।।

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।