तू माँ के द्वारे झुक जा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अरे ऊंचे पर्वत चढ़ चलो,

श्रद्धा से आगे बढ़ चलो,

हमे माँ का बुलावा आया है,

हमे उसने आज बुलाया है,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

ओ बन के, ओ बन के,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

जगदाति, वरदाति,

जगदम्बे मैया भर देगी,

भंडार तुम्हारे धन से,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

ओ बन के, ओ बन के

तू माँ के द्वारे झुक जा रे

एक बार सवाली बन के

ओ बन के, ओ बन के......

वो दुर्गे है, वो काली है

वो वैष्णो भवनों, वाली है

वो लक्ष्मी है, महादाति है

वो शारदा भी, कहलाती है

वो अम्बे जगदम्बे,

ज़र्रों को तारे कर देती,

वो पन्ने नील गगन के,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

ओ बन के, ओ बन के,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

ओ बन के, ओ बन के........

अरे ऊंचे पर्वत चढ़ चलो,

श्रद्धा से आगे बढ़ चलो,

हमे माँ का बुलावा आया है,

हमे उसने आज बुलाया है,

वो तुम्हे ख़ुशी का, घर देगी

माटी को सोना, कर देगी

वो गूंगो को, बुला सकती

वो रोते मुँह, हसा सकती

वो मैया, वो मैया,

भक्तो के घर में भेजती झौंके,

खुशियों भरी पवन के,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

ओ बन के, ओ बन के,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

ओ बन के, ओ बन के......

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

ओ बन के, ओ बन के,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

जगदाति, वरदाति,

जगदम्बे मैया भर देगी,

भंडार तुम्हारे धन से,

तू माँ के द्वारे झुक जा रे,

एक बार सवाली बन के,

ओ बन के, ओ बन के

तू माँ के द्वारे झुक जा रे

एक बार सवाली बन के

ओ बन के, ओ बन के......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।