नयी उड़ान अब भर ले तू

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॥ पावन पाठ ॥

नयी उड़ान अब भर ले तू,

नये ढंग से जी ले तू,

सपने होंगे पुर तेरे,

फिर से छड़ी घुंमाले तू।।

आशाओ की छड़ी है तेरे हाथो में,

किरण सुनहरी खड़ी है तेरी राहो में,

नयी सुबह आई जीवन में,

अपना जीवन जी ले तू,

नयी उड़ान अब भर ले तू,

नये ढंग से जी ले तू।।

ख्वाहिश अपनी करले पूरे जीवन में,

अमर प्यार को भर ले अपने जीवन में,

काटो में जो फूल खिला है,

अपना जीवन जी ले तू,

नयी उड़ान अब भर ले तू

नये ढंग से जी ले तू।।

मुश्किल तो आती और जाती छाया है,

फिर भी हमने गीत खुशी का गाया है,

हंसता गाता चेहरा लेकर,

अपना जीवन जी ले तू,

नयी उड़ान अब भर ले तू,

नये ढंग से जी ले तू........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।