पलकें बिछाये आस लगाये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पलकें बिछाये आस लगाये बैठी पुजारन,

आयेगी मैया,

पलकें बिछाये आस लगाये बैठी पुजारन,

आयेगी मैया,

कितने जनम ले, तुझको पुकारा,

कहता है ये मन, आयेगी मैया,

पलकें बिछाये आस लगाये बैठी पुजारन,

आयेगी मैया.......

दरस दीवानी प्यासी अखियाँ,

देखने तुझको तरस रही है,

दरस दीवानी प्यासी अखियाँ,

देखने तुझको तरस रही है,

कब से निरंतर विरह की झड़ियाँ,

नैनो से रिमझिम बरस रही है,

गिरने से पहले तन की इमारत,

कहती है धड़कन, आयेगी मैया

पलकें बिछाये आस लगाये बैठी पुजारन,

आयेगी मैया,

कितने जनम ले......

दर्शन मैया दे अब तेरे,

तड़प रही हू चैन ना आये,

दर्शन मैया दे अब तेरे,

तड़प रही हू चैन ना आये,

तेरा सुमिरन करते करते,

भटक रही हू चैन ना आये,

चाहे विधाता फिर भी माता,

अपना ये बंधन तोड़ ना पाये,

पलकें बिछाये आस लगाये बैठी पुजारन,

आयेगी मैया,

कितने जनम ले, तुझको पुकारा,

कहता है ये मन, आयेगी मैया,

पलकें बिछाये आस लगाये बैठी पुजारन,

आयेगी मैया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।