प्रभु तुम्हीं ने दिया है जीवन तुम हीं इसे बचाना

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॥ पावन पाठ ॥

प्रभु तुम्हीं ने दिया है जीवन, तुम हीं इसे बचाना,

मेरे प्रभुजी आना ओ ओ मेरे प्रभुजी आना,

प्रभु तुम्हीं ने दिया है जीवन, तुम हीं इसे बचाना।।

किस से कैसी भूल हुए जो आयी ये महामारी,

देखी नहीं जाती अपनों की लाचारी,

काल क्रूर चाहे सभी का जलता दीप बुझाना,

मेरे प्रभुजी आना ओ ओ मेरे प्रभुजी आना।।

भूल हुई हो जो भी हमसे उसे क्षमा कर देना,

कृपा सिंधु है दयालु भगवन इतनी कृपा कर देना,

निश प्राणो में प्राण फूक दे, ऐसी तान सुनाना,

मेरे प्रभुजी आना ओ ओ मेरे प्रभुजी आना।।

एक तुम्ही से आस प्रभु नहीं सहारा दूजा,

आराधन करते हूँ तेरा और करे नित पूजा,

राह कोई ना हमको सूझे तुम्ही राह दिखाना,

मेरे प्रभुजी आना ओ ओ मेरे प्रभुजी आना।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।