दीनानाथ आंगली

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आया सरसी जी श्याम थाने,

आया सरसी जी श्याम थाने,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

म्हारी पीड़ हरो घनश्याम आज,

थाने आया सरसी जी,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

सांवरा,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

श्री श्याम, आजा मेरे घनश्याम,

तेरो नाम, तेरो नाम,

रटता सुबह और शाम।

था बिन म्हारे सिर पै बाबा,

कुण तो हाथ फिरावे,

कुण तो हाथ फिरावे,

सगला मुण्डो फेर के बैठ्या,

कुण म्हाने गले लगावे,

मजधारा स्यूं बेड़ो कईयां,

मजधारा स्यूं बेड़ो कईयां,

पार उतरसी जी,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

सांवरा,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी।

म्हारी हालत सेठ सांवरा,

थासू कोन्या छानी,

थासू कोन्या छानी,

एक बार थे पलक उघाड़ो,

देखो म्हारे कानी,

थारे देख्या बिगड़ी म्हारी,

थारे देख्या बिगड़ी म्हारी,

श्याम सुधरसी जी,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

सांवरा,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी।

आंख्या सामी घोर अंधेरो,

कुछ ना सूझे आगे,

ईब के होसी सोच सोच के,

म्हाने तो डर लागे श्याम,

हर्ष म्हारे आगे को रस्तो,

हर्ष म्हारे आगे को रस्तो,

श्याम ही करसी जी,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

सांवरा,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

म्हारी पीड़ हरो घनश्याम आज,

थाने आया सरसी जी,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

सांवरा,

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण तो पकड़सी जी,

श्री श्याम, आजा मेरे घनश्याम,

तेरो नाम, तेरो नाम,

रटता सुबह और शाम।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।