दीवाने है जो उस प्रभु के

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – दीवानो से ये मत पूछो

दीवाने है जो उस प्रभु के,

उनको दुनिया से काम नहीं,

काम नहीं काम नहीं,

मन रहता है प्रभु चिंतन में,

पल भर करता आराम नहीं,

दीवाने है जो उस प्रभु के।।

वे जग चिंता से मुक्त रहे,

और मगन रहे हरी सुमिरन में,

जगदीश हरे जगदीश हरे,

रसना पे दूजा नाम नहीं,

दीवाने है जो उस प्रभु के......

जिसको पी और नहीं पीते,

जिसका ना कभी ढलता है नशा,

उस राम नाम की मदिरा के,

तुम क्यों पीते हो जाम नहीं,

जाम नहीं जाम नहीं,

दीवाने है जो उस प्रभु के......

वे नर ही नहीं नर अधम कहो,

और वो पशुओ से भी बत्तर है,

उनका जीना क्या जीना है,

जिनके व्यवहार में राम नहीं,

दीवाने है जो उस प्रभु के,

उनको दुनिया से काम नहीं,

काम नहीं काम नहीं,

मन रहता है प्रभु चिंतन में,

पल भर करता आराम नहीं,

दीवाने है जो उस प्रभु के।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।