कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे,

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे,

कबहुँ मिलोगे राम, कबहुँ मिलोगे श्याम,

कबहुँ मिलोगे चितचोर हमारे,

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे।

जैसे मिले प्रभु बलिराजा सो,

चार मॉस द्वारे पे ठाडे,

जैसे मिले प्रभु ध्रुपद सुता सो,

खेंचत चीयर दुशाशन हारे,

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे।

जैसे मिले प्रह्लाद भगत सो,

खम्ब फाड़ हिरणाकुश मारे,

जैसे मिले प्रभु भगत विभीषण,

लंका जार निसाचर मारे,

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे।

जैसे मिले प्रभु नरसी भगत सो,

भात भरण हरी आप पधारे,

सूरदास को कबहुँ मिलोगे,

टपकत टपकत नैन हमारे,

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे।

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे,

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे,

कबहुँ मिलोगे राम कबहुँ मिलोगे श्याम,

कबहुँ मिलोगे चितचोर हमारे,

कबहुँ मिलोगे दीनानाथ हमारे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।