मुरली की मधुर सुना दो तां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

मई हुतेरी प्रेम दीवानी, मुझको तू पहचान, मधुर सुना दो तां,

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

जब से तुम संग मैने अपने नैना जोड़ लिए है,

जब से तुम संग मैने अपने नैना जोड़ लिए ही,

क्या मैया क्या गोकुल सबसे रिश्ते तोड़ लिए है,

क्या मैया क्या गोकुल सबसे रिश्ते तोड़ लिए है,

तेरे मिलन को व्याकुल है काब्से मेरे प्राण, मधुर सुना दो तां,

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

सागर से भी गहरे मेरे प्रेम की गहराई,

सागर से भी गहरे मेरे प्रेम की गहराई,

लोक लाज कुल की बरिया ना साज धज मई तो आई,

लोक लाज कुल की बरिया ना साज धज मई तो आई,

मेरी प्रीत से ओह निर्मोही अब ना बनो अंजान, मधुर सुना दो तां,

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

मैया रूठी बाबुल रूठे कोई ना सुनत हुमारी,

मैया रूठी बाबुल रूठे कोई ना सुनत हुमारी,

तेरी प्रीत के कारण हो गया सारा जाग मोरा बैरी,

तेरी प्रीत के कारण हो गया सारा जाग मोरा बैरी,

किसकी शरण मेी जाो दुखिया ट्यू ही बता भगवान, मधुर सुना दो तां,

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

मई हुतेरी प्रेम दीवानी, मुझको तू पहचान, मधुर सुना दो तां,

ओह कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तां,

मधुर सुना दो तां, मधुर सुना दो तां,

मधुर सुना दो तां, मधुर सुना दो तां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।