मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी विनती ना इगनोर करो,

अर्जेंट काम बाबा स्योर करो,

एक साल तेरे भगतांन तू कुछ भी दे,

मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे,

मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे.......

सब चौपट हो गए धंधे हैं, सब कैद घरां में बन्दे हैं,

बनड़ा बनते बनते रह गए, उनके घने भाग मंदे हैं,

कार्ड तक भी बंट गए थे, तू डीजे फेर बजवा दे,

मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे,

मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे......

दुनियाँ में कहर मचाया है, बड़ा माड़ा टैम दिखाया है,

तू उनके चूड़ी चढ़ा बाबा, जिनने यो कहर मचाया है,

पकड़ के इस वायरस की मुंडी, तू धुनें बीच जला दे,

मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे,

मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे......

तू नीलकंठ कहलाता है, देवों का मान बढ़ाता है,

पर तेरा और मेरा तो भगवान् भगत का नाता है,

“कमल सिंह” कैलाश छोड़ के एक राउंड जगत का लादे,

मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे,

मेरे भोलेनाथ कोरोना की छाती पे त्रिशूल चला दे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।