ना अब रुला साँवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ना अब रुला..... मेरे साँवरे,

रूठी मेरी किस्मत, उसे आके बना दे,

डोले मेरी नैयाँ, उसे पार लगा दे,

ना अब रुला......... ।

तेरे ही भरोसे श्याम, रहता हूँ मैं तो,

तू ना बनाए काम, जाऊं कहाँ रे,

जग में भगत श्याम, लाखों हैं तेरे,

मैं भी पड़ा हूँ श्याम, चरणों में तेरे रे,

चरणों में तेरे,

ना अब रुला.... मेरे साँवरे,

रूठी मेरी किस्मत, उसे आके बना दे,

डोले मेरी नैयाँ, उसे पार लगा दे,

ना अब रुला......... ।

रोते हैं नैन मेरे, तड़प रहा हूँ,

तेरी एक झलक की खातिर, तरस रहा हूँ,

ऐसे ना कठोर बनों, श्याम हमारे,

तुम तो हमेशा बने, हारे के सहारे रे,

हारे के सहारे,

ना अब रुला.... मेरे साँवरे,

डोले मेरी नैयाँ, उसे पार लगा दे,

रूठी मेरी किस्मत, उसे आके बना दे,

ना अब रुला......... ।

तुम तो हो बाबा श्याम, जग के खिवैया,

मुझ को किनारे लगा दो, डूबे है नैया,

गहरा घना है सागर, ओ मेरे सांवरे,

डूबने लगा हूँ बाबा, आके संभाल रे,

आके संभाल रे,

ना अब रुला.... मेरे साँवरे,

रूठी मेरी किस्मत, उसे आके बना दे,

डोले मेरी नैयाँ, उसे पार लगा दे,

ना अब रुला..... मेरे साँवरे,

रूठी मेरी किस्मत, उसे आके बना दे,

डोले मेरी नैयाँ, उसे पार लगा दे,

ना अब रुला......... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।