मैं झण्डेवाली दे लड़ लागियां

मनीष अनेजा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं झण्डेवाली दे लड़ लागियां ॥

मेरे तों गम परे रहन्दे ॥

मेरी आसान उम्मीदां दे ॥

सदा बूटे हरे रेह्न्दे। .....

दुआवां रल्ल करो सखियों , मेरी मैया न रूस जावे॥

जिन्ना नाल मैया रूस जांदी। , ओ जियांदे जी मरे रेह्न्दे॥

मैं झण्डेवाली दे लड़ लागियां।

नियाजी मैनु डर कादा, मेरी मैया है लासानी॥

जेहड़े झंडेवाली दे हो जांदे, ओह सों रब्ब दी खरे रेह्न्दे॥

मैं झण्डेवाली दे लड़ लागियां।

कदे वि लोड़ नई पैंदी , मैनु दर दर तो मंगणे दी॥

मैं झण्डेवाली डा मंगता हाँ , मेरे पल्ले भरे रेह्न्दे॥

मैं झण्डेवाली दे लड़ लागियां।

स्वर:मनीष अनेजा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।