सज के चली राधा प्यारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सज के चली राधा प्यारी अरे राधा प्यारी,

सज के चली राधा प्यारी अरे राधा प्यारी ॥

बेनी फूलन गुच्छा सोहे,

बेनी फूलन गुच्छा सोहे,

मोतिन मांग संवारी,

अरे राधा प्यारी ॥

सज के चली राधा प्यारी अरे राधा प्यारी ।

मोटी मोटी अंखियां बड़ी सलोनी,

मोटी मोटी अंखियां बड़ी सलोनी,

काजल रेख संवारी,

अरे राधा प्यारी ॥

सज के चली राधा प्यारी अरे राधा प्यारी ।

अंगिया सो रंग चुनरी पचरंग,

अंगिया सो रंग चूनरी पचरंग,

सोहे चौमुख सारी,

अरे राधा प्यारी ॥

सज के चली राधा प्यारी अरे राधा प्यारी ।

गोरे गोरे हाथन मेहंदी रच रही,

गोरे गोरे हाथन मेंहदी रच रही,

ऊंगल में मुंदरी भारी,

अरे राधा प्यारी ॥

सज के चली राधा प्यारी अरे राधा प्यारी ।

हस हस बात करत सखियन सो,

हस हस बात करत सखियन सो,

मिल गए कुंज बिहारी,

अरे राधा प्यारी ॥

सज के चली राधा प्यारी अरे राधा प्यारी ।

अरे राधा प्यारी,

अरे राधा प्यारी,

अरे राधा प्यारी ॥

राधे राधे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।