ब्रह्मा माने विष्णु माने

पारंपरिक
श्री गणेश आरती शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ॐ नमः शिवाय:

हरि ओम नमः शिवाय:

ब्रह्मा माने विष्णु माने नारद वीणा से गायें,

हरि ओम नमः शिवाय:

जटा में जिनकी गंगा विराजे,

मस्तक चन्द्र सुहाय,

हरि ओम नमः शिवाय:

गौरा जिनकी करें आरती,

गणपति जिनके जाये,

हरि ओम नमः शिवाय:

गले में मुण्डमाला विराजे,

शेष नाग लिपटाये,

हरि ओम नमः शिवाय:

भोले भाले यह भण्डारी,

सबके कष्ट मिटाये,

हरि ओम नमः शिवायः

यही मंत्र जपने से तेरा,

कार्य सिद्ध हो जाये,

हरि ओम नमः शिवायः

गोरे तन पर भस्म लगाये,

भांग धतूरा खाये,

हरि ओम नमः शिवायः

इतनी अरज सुनो मेरे बाबा

नित दर्शन को आये,

हरि ओम नमः शिवायः

दिव्य नाम तेरा जपते जपते

प्राण बदन से जाये

हरि ओम नमः शिवाय:

बाबा बैठे आनन्देश्वर में,

आनन्द रहे लुटायें,

हरि ओम नमः शिवाय:

नंदी पर जो करे सवारी,

बांधम्बर लिपटाये,

हरि ओम नमः शिवायः

हाथो कमण्डल गले में माला,

नीलकंठ कहलाये,

हरि ओम नमः शिवाय:

शिवजी का यह महामंत्र है,

जो गाये सो पाये,

हरि ओम नमः शिवायः

बाबा बैठे अमरनाथ पर,

अमृत रहे लुटाये,

हरि ओम नमः शिवायः

बाबा हमारे हम बाबा के,

सभी भक्त मिलकर गायें,

हरि ओम नमः शिवायः

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।