बाबाजी तेरी शान निराली है

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैंने देख लई आंखों से,

बाबा जी तेरी शान निराली है॥

सील संत शिव जी का मंदिर कटवा जाली हैं,

सीताफल का वृक्ष खड़ा जाकी झुक रही डाली है,

मैंने देख लई आंखों से बाबा जी तेरी शान निराली है॥

गहरा खुद रहा बाग चरे गऊ ना कोई पाली है,

दादर मोर पपैया बोले कोयल काली है,

मैंने देख लई आंखों से बाबा जी तेरी शान निराली है॥

गुजरियों का लारा हांडे भोली भाली है,

माटी छांटें शक्कर बांटे भर भर थाली हैं,

मैंने देख लई आंखों से बाबा जी तेरी शान निराली है॥

तुलेराम नै भी छोड़ दायी सब चाल कुड़हाली है,

रामचंद्र नै लगा दयी ताले मैं चाबी है,

मैंने देख लई आंखों से बाबा जी तेरी शान निराली है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।