मेरा श्याम बड़ा अलबेला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला.......

कभी गंगा के तीर,

कभी यमुना के तीर,

कभी गंगा के तीर,

कभी यमुना के तीर,

कभी सरयू में नहाये अकेला,

कभी सरयू में नहाये अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला.......

कभी गोपियों के संग,

कभी ग्वालों के संग,

कभी गोपियों के संग,

कभी ग्वालों के संग,

कभी गउवे चराये अकेला,

कभी गउवे चराये अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला.......

कभी भामा के संग,

कभी रुक्मण के संग,

कभी भामा के संग,

कभी रुक्मण के संग,

कभी राधा के संग अकेला,

कभी राधा के संग अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला......

कभी सूरज के संग,

कभी चंदा के संग,

कभी सूरज के संग,

कभी चंदा के संग,

कभी तारो से खेले अकेला,

कभी तारो से खेले अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला.......

कभी संतों के संग,

कभी भक्तों के संग,

कभी संतों के संग,

कभी भक्तों के संग,

कभी मस्ती में बैठा अकेला,

कभी मस्ती में बैठा अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।