साँवरे दर्द सहा ना जाये रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साँवरे देर ना कर अब आजा,

दिल ये मेरा घबराये,

दर्द सहा ना जाये रे।

साँवरे दर्द सहा ना जाये रे,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियां,

ओ लीले घोड़े की कर के तू सवारियां,

साँवरे दर्द सहा ना जाये रे,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियां,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ.......

हारा ऐसा हारा मैं तो, हारे से भी हारा हूँ,

कोई न सहारा मेरा, मैं तो बेसहारा हूँ,

हारे का सहारा, हारें का सहारा,

तुझे कहती हैं दुनियाँ, गले से लगा ले मुझे,

बड़ा दुखियारा हूँ,

क्यों बीते रो रो ये मेरी जिन्दगानिया,

सांवरे दर्द सहा ना जाये रे,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ.......

आजा रे कन्हैयाँ मेरा दिल रो रहा है,

कभी ना हुआ जो बाबा अब हो रहा है,

तड़पू में ऐसे जैसे होठो पे जाम रे,

फीके फीके लगते सारे, जलवे ज़हान के,

मुझे पतझड़ सी लागे फुलवरिया,

सांवरे दर्द सहा ना जाये रे,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ.......

कर्मों से अपने मैने, चोट ऐसी खायी है,

जाने किस मोड़ पे ये, ज़िन्दगी ले आयी है,

सूझे ना किनारा, सूझे ना किनारा,

मेरी नाव मझदार है,

तेरी दरकार मुझे, तेरी दरकार है,

किसे अपनी सुनाऊ मैं कहानियां,

सांवरे दर्द सहा ना जाये रे,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ.......

बेटा है ये तेरा “संजू” ना कोई यक़ीम है,

तेरी रहमतों पे बाबा, मुझको यकीन है,

कौन क्या बिगाड़े, कौन क्या बिगाड़े बाबा,

तू जो मेरे साथ है, जन्मो ज़नम से मेरे,

सिर पे तेरा हाथ है,

करदे प्यार से गालो पे दुलारियाँ,

साँवरे दर्द सहा ना जाये रे,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियां,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियां,

सांवरे दर्द सहा ना जाये रे,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियां,

ओ लीले घोड़े की कर के तू संवारिया,

सांवरे दर्द सहा ना जाये रे,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ,

आजा आजा तू करदे मेहरबानियाँ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।