हे दीन बन्धु दयालु

अनुराधा पौडवाल
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे दीन बन्धु दयालु शंकर जानि जन अपनाइयो।

भव सागर पार उतार मोको निज समीप बसाईयो।।

हे दीन बन्धु दयालु शंकर जानि जन अपनाइयो।

जाने अजाने पाप मेरोहे नाथ क्षण नसाइयो,

कर जोरि जोरि औरी मांगो देव दर्श दिखाइयो,

हे दीन बन्धु दयालु शंकर जानि जन अपनाइयो।।

देवी सहाय सुनाय शिवजी को प्रेम सहित जो गावहीं,

छुट जाहि जगजोनि से सर्वदा सुख पावहीं,

हे दीन बन्धु दयालु शंकर जानि जन अपनाइयो,

भव सागर पार उतार मोको निज समीप बसाईयो,

हे दीन बन्धु दयालु शंकर जानि जन अपनाइयो।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।