बिन हरी नाम गुजारा नहीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बिन हरी नाम गुजारा नहीं,

रे बावरे मन किनारा नहीं॥

नांव पुरानी चंचल धारा,

मौसम तूफानों का,

खेते खेते हिम्मत हारी,

डगमग डोले नौका,

प्रीतम को जो पुकारा नहीं,

रे बावरे मन किनारा नहीं।

फँसता क्यों जाता माया में तू,

ये है नागिन काली,

डस जायेगी बचकर रहना,

चौतरफा मुँह वाली,

फिर ये जनम दुबारा नहीं,

रे बावरे मन किनारा नहीं।

इब तो तूँ बस इस नैया को,

करदे श्याम हवाले,

बस की बात नहीं बन्दे की,

ये दातार संभाले,

झूठा अहम गंवारा नहीं,

रे बावरे मन किनारा नहीं।

ये मौका भी चूक गया तो,

क्या है आनी जानी,

श्याम बहादुर शिव जाग नींद से,

जीवन ओस का पानी,

भूल के सोना दुबारा नहीं,

रे बावरे मन किनारा नहीं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।