माँ द्वार तेरे आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी दया से चलके, मैं द्वार तेरे आया

कृपा हुई तुम्हारी, मुझे तुमने जो बुलाया

तेरी दया से चलके, मैं द्वार तेरे आया ॥

दुनिया की चाकरी में बीता है सारा जीवन,

इस भाग दौड़ में ही उलझा सदा मेरा मन,

बीते जवानी बचपन… मैंने होश गवाया,

तेरी दया से चलके, मैं द्वार तेरे आया ॥

सदा ठोकरे ही खाई कभी मैं सम्भल ना पाया,

मोह जाल में जो जकड़ा उससे निकल ना पाया,

परिवार पालने में… मैंने समय बिताया,

तेरी दया से चलके, मैं द्वार तेरे आया ॥

जागा जो नींद से मैं मां तेरी याद आई,

तेरे ही नाम से ही मैंने लगन लगाई,

अपना रहा ना कोई… जग हो गया पराया,

तेरी दया से चलके, मैं द्वार तेरे आया ॥

हरीश की जिंदगी है मैया तेरे हवाले,

मर्जी है तेरी अम्बे इसे छोड़ या संभाले,

भूलन ने मस्त होके… गुणगान तेरा गाया,

तेरी दया से चलके, मैं द्वार तेरे आया

कृपा हुई तुम्हारी, मुझे तुमने जो बुलाया

तेरी दया से चलके, मैं द्वार तेरे आया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।