तेरे नाम की मुझको लगन लगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लगन लगी मोहे लगन लगी,

तेरे नाम की मुझको लगन लगी,

तेरे रंग में मैं तो रंग ही गयी,

तेरी प्रीत में मैं तो डूब गई,

तेरी प्रीत का ऐसा रंग चढ़ा,

तेरी बंसी की धुन बींद गयी,

मेरे अंतर्मन को चीर गई,

सांवरिया सांवरिया,

सांवरिया सांवरिया।।

यशोदा की आँखों का तारा,

अपने भक्तों का है प्यारा,

पालनहारा कृष्ण कन्हैया,

तू चितचोर है बंसी बजैया तू,

सांवरिया सांवरिया,

सांवरिया सांवरिया।।

चोरी कर माखन खाता तू,

भक्तों के चित को चुराता था,

काली कमली है बांकी चितवन,

वा पे वारूँ मैं तो तन मन,

सांवरिया सांवरिया,

सांवरिया सांवरिया।।

अच्युतम केशवम कृष्ण दमोदराम,

राम नारायणम जानकी वल्लभम,

कौन कहता है भगवान आते नहीं,

तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं।

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,

हे नाथ नारायण वासुदेवा,

पित मात स्वामी सखा हमारे,

हे नाथ नारायण वासुदेवा,

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,

हे नाथ नारायण वासुदेवा।

राधे कृष्णा राधे कृष्णा .........

जो है अलबेला मद नैनो वाला,

जिसकी दीवानी ब्रिज की हर बाला,

वो किसना है वो किसना है,

वो किसना है वो किसना है,

गोविन्द बोलो हरी गोपाल बोलो,

राधा रमण हरी गोविन्द बोलो........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।