मईया मोरे अंगना आई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं,

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं,

पैयां लागूं मैया पैयां लागूं,

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं।

काहू देख मैया अंगना आई,

काहू देख मैया अंगना आई,

काहो... देख मुस्कानी,

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं,

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं।

भक्ति देख मैया अंगना आई,

भक्ति देख मैया अंगना आई,

पूजा... देख मुस्कानी,

निहुरके पैयां लागूं,

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं।

छम छम छनन बाजे पैजाइयाँ,

छम छम छनन बाजे पैजाइयाँ,

चुड़िया... शोर मचाई,

निहुरके पैयां लागूं,

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं।

माथे सिंदुरवा लगाओ सखी प्यारी,

माथे सिंदुरवा लगाओ सखी प्यारी,

मैया.... मन मुस्काई,

निहुरके पैयां लागूं,

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं,

पैयां लागूं मैया पैयां लागूं,

मैया मोरे अंगना आई,

निहुरके पैयां लागूं.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।