सांवरे कर दो नज़रें कर्म

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवरे, सांवरे, सांवरे,

कर दो नज़रें कर्म सांवरे,

सांवरे, सांवरे, सांवरे,

कर दो नज़रें कर्म सांवरे,

कर दो नजरे कर्म सांवरे,

कर दो नजरे कर्म सांवरे,

सांवरे, सांवरे, सांवरे,

कर दो नज़रें कर्म सांवरे॥

मुझको दुनिया की दौलत नहीं चाहिए,

मुझको इज्ज़त हुकुमत नहीं चाहिए,

मेरे दिल में बसो सांवरे,

मेरे दिल में बसो सांवरे,

सांवरे, सांवरे, सांवरे,

कर दो नजरे कर्म सांवरे॥

मैं तो आशिक़ तेरा हूँ दीवाना तेरा,

तेरे चरणों में अब है ठिकाना मेरा,

मैं तेरा तुम मेरे सांवरे,

मैं तेरा तुम मेरे सांवरे,

सांवरे, सांवरे, सांवरे,

कर दो नजरे कर्म सांवरे॥

तेरे दर के सिवा फ़िर कहाँ जाऊँ मैं,

तम ही बोलों की तुमको कहाँ पाऊँ मैं,

बोलो बोलो जरा सांवरे,

बोलो बोलो जरा सांवरे,

सांवरे, सांवरे, सांवरे,

कर दो नजरे कर्म सांवरे॥

काली कमली के लाखों दीवाने हुए,

तिरछी नजरों के आशिक पुराने हुए,

मैं बना बावरा सांवरे,

मैं बना बावरा सांवरे,

सांवरे, सांवरे, सांवरे,

कर दो नजरे कर्म सांवरे,

सांवरे, सांवरे, सांवरे,

कर दो नज़रें कर्म सांवरे.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।