सत री संगत करिये

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सतसंगत री एक घड़ी,

तो माला बरस पचास,

इंद्र तेरी एक घड़ी,

कुआ बारह मास।

सत री संगत रा महातम सुणिये,

राम सभा करिये, जी,

शूरवीरों रा अही है लक्षण,

समझ पाँव धरिये जी,

साधू भाई, सत री संगत करिये।

एकण रंग एकण वरण,

एकण घाट घड़िये जी,

शूरवीरों रा अही है लक्षण,

समझ पाँव धरिये जी,

ओ साधु भाई,

सत री संगत करिये, ओ,

प्रभु भजन रे कारणे जी,

मानुष देह धरिए जी

ओ साधू भाई,

सत री संगत करिये, ओ राम।

सोना चांदी परदा धरिए,

लोहा चौक धरिए, ओ जी,

काम पड़िया झगड़े माहीं जावे,

शूरवीरो से अड़िये,

ओ साधू भाई,

सत री संगत करिये, ओ राम।

दया गरीबी और आधीनता,

पापी तो रुलिये, ओ जी,

पुरखदास सतगुरु रे शरणे,

भवसागर तिरिए,

ओ साधू भाई,

सत री संगत करिये, ओ राम।

सत री संगत रा महातम सुणिये,

राम सभा करिये, ओ,

शूरवीरों रा अही है लक्षण,

समझ पाँव धरिये जी,

साधू भाई, सत री संगत करिये।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।