चुनरिया जयपुर वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली माँ को आज उढाऊ,

चुनरिया जयपुर वाली,

चुनरिया जयपुर वाली,

मैं तो वारि बलिहारी जाऊ,

ओ मैया शेरावाली,

चुनरिया जयपुर वाली…………

गंगाजल में धोकर लाई,

प्रेम भक्ति के रंग रगाई,

मैं तो रज रज दर्शन पाऊ,

ओ मैया शेरावाली,

चुनरिया जयपुर वाली…………

चुनरी के बीच माँ का मुखड़ा,

चमक रहा जैसे चाँद का टुकड़ा,

मैं तो मन ही मन हरषाऊ,

ओ मैया शेरावाली,

चुनरिया जयपुर वाली………..

है जग में प्रताप तुम्हारा,

संगीता को दे दो सहारा,

भगतों को दे दो सहारा,

मैं तो चंचल मन मुस्काऊ,

ओ मैया शेरावाली,

चुनरिया जयपुर वाली……….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।